बुलेटिन इंडिया, संवाददाता।
रांची/जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास मंगलवार को हुए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट में भारतीय सेना के दो जांबाज जवान शहीद हो गए। शहीदों में सेना के कैप्टन सरदार करमजीत सिंह बक्शी उर्फ पुनीत शामिल हैं, जो झारखंड के हजारीबाग जिले के निवासी थे। इस हमले में एक अन्य सैन्यकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह हमला मंगलवार को तब हुआ जब सेना की एक टीम गश्त पर थी। इसी दौरान आतंकियों द्वारा बिछाए गए आईईडी विस्फोटक में विस्फोट हो गया, जिससे सेना के दो जवान मौके पर ही शहीद हो गए। भारतीय सेना ने घटना के तुरंत बाद इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी का परिवार और पृष्ठभूमि
शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी का परिवार झारखंड के हजारीबाग जिले के जुलू पार्क के पास रहता है। उनके पिता अजिंदर सिंह बक्शी और माता नीलू बक्शी अपने बेटे की शहादत की खबर सुनकर गहरे शोक में हैं। करमजीत सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हजारीबाग में पूरी की थी और बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखा था। उनकी बहादुरी और देशभक्ति को देखते हुए उनका चयन भारतीय सेना में हुआ और उन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
हजारीबाग में शोक की लहर
कैप्टन करमजीत सिंह की शहादत की खबर जैसे ही हजारीबाग पहुंची, पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों और उनके परिचितों ने उनके परिवार को सांत्वना दी। शहर के विभिन्न संगठनों और प्रशासन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
आतंकी हमले के खिलाफ सेना की कार्रवाई
भारतीय सेना ने इस कायराना हमले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, आतंकियों की इस नापाक हरकत का करारा जवाब दिया जाएगा। सेना ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को नमन किया और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी और अन्य शहीद जवानों का बलिदान देश के लिए एक गर्व का विषय है, लेकिन उनके परिवार और पूरे झारखंड के लिए यह अपार दुख की घड़ी भी है। उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता, और उनकी याद हमेशा लोगों के दिलों में बनी रहेगी।